मात्रा-गणना
सीखें
छान्दसिक काव्य रचना के लिए मात्राओं को समझना तथा मात्राओं की
गणना का ज्ञान आवश्यक है। हिंदी की बारहखड़ी सभी ने पढ़ी है। हिंदी वर्णमाला में
स्वरों की संख्या 13 होती है जिसमें अं (अनुस्वार) एवं अः(विसर्ग) कहलाता है।
मात्राओं की गिनती करने का नियम निम्नवत है।
मात्राएँ - अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ऋ ओ औ अं
अः ।
उपरोक्त में बोल्ड
लेटर को दो मात्रा गिना जाता है और इसे अँग्रेजी के एस (S)अक्षर से दर्शाया जाता
है, जबकि जो लेटर बोल्ड नहीं हैं उनकी मात्रा एक गिनी जाती है तथा उन्हें आई (।)
अक्षर से दर्शाया जाता है। अं (अनुस्वार) को दो मात्रा गिना जाता है और अः
(विसर्ग) को भी दो मात्रा गिना जाता है।
वर्ण/ व्यंजन –
क
ख ग घ ङ
च
छ ज झ ञ
ट
ठ ड ढ ण
त
थ द ध न
प
फ ब भ म
य
र ल व श
ष स ह
क्ष त्र ज्ञ , श्र
उपरोक्त
में क से ज्ञ तक सभी व्यंजनों को लघु अर्थात् एक (।) मात्रा माना जाता है क्योंकि
यह अक्षर क्+अ =क, ख्+अ =ख.... सभी वर्ण अ स्वर लगने पर पूर्ण हुए हैं। जबकि अंत
में बोल्ड कर दर्शाये संयुक्त वर्ण क्ष त्र ज्ञ शब्द में अपने पूर्व के लघु को
गुरु अर्थात् द्विमात्रिक में बदल देते हैं।
स्वर
रहित अर्थात् हलन्त युक्त व्यंजन जैसे क्,
च्, छ्, प् आदि सभी की कोई मात्रा नहीं गिनी जाती किन्तु ये स्वर रहित व्यंजन शब्द
में अपने पूर्व के लघु को दीर्घ अर्थात् द्विमात्रिक बना देते हैं।
हिंदी
में लघु अर्थात् एक मात्रा एवं गुरु
अर्थात् दो मात्रा ही गणना में प्रयुक्त होती है प्लुत हिंदी में प्रयुक्त नहीं
होता।
चन्द्रबिन्दु - ঁ चंद्रबिंदु अर्थात् अनुनासिक एक मात्रिक के अंतर्गत ही आता है।
इसकारण इसकी पृथक से कोई मात्रा नहीं गिनीं जाती है।
आइये लघु मात्रिक
शब्द देखें - कल = लघु+लघु =
2 मात्रा, कमल = लघु+लघु+लघु = 3
मात्रा
तुम = लघु+लघु =2 मात्रा, दिल =लघु+लघु = 2 मात्रा, कृत
= लघु+लघु = 2 मात्रा, पनघट =लघु+लघु+लघु+लघु
=4 मात्रा, सुनयन =
लघु+लघु+लघु+लघु = 4 मात्रा,
पथिक = लघु+लघु+लघु = 3 मात्रा
मृत = लघु+लघु = 2 मात्रा, क्रम = लघु+लघु = 2 मात्रा,
श्रमिक = लघु+लघु+लघु
= 3 मात्रा, प्लुत = लघु+लघु =2
मात्रा, हँस = लघु+लघु =2 मात्रा,
आइये गुरु
(द्विमात्रिक) शब्द देखें – आना =
गुरु+गुरु = 4 मात्रा, खाया = गुरु+गुरु =4 मात्रा,
बंजारा = गुरु+गुरु+गुरु = 6 मात्रा, खूँटी= गुरु+गुरु= 4 मात्रा, चम्पा =गुरु+गुरु = 4 मात्रा, गुण्डा=गुरु+ गुरु =4 मात्रा, चंगा = गुरु+गुरु=4 मात्रा, पोथी = गुरु+गुरु = 4 मात्रा.
ग्यानी =
गुरु+गुरु = 4 मात्रा, नेता = गुरु+गुरु = 4 मात्रा, प्यारा = गुरु +गुरु = 4 मात्रा.
मिश्रित मात्रिक शब्द - त्याग = गुरु
+लघु = 3 मात्रा, स्वास्थ्य = गुरु +लघु = 3 मात्रा,
प्यार = गुरु +लघु = 3 मात्रा. चंदा
= गुरु+गुरु = 4 मात्रा, अनजान = लघु+लघु+गुरु+लघु = 5 मात्रा.
कष्ट = गुरु +लघु = 3 मात्रा प्रिया = लघु +गुरु = 3 मात्रा, श्याम
=गुरु +लघु = 3 मात्रा.
कृष्ण =गुरु +लघु = 3 मात्रा. नृत्य = गुरु +लघु = 3 मात्रा.
हत्या = गुरु +गुरु =4 मात्रा.
#
पारम्परिक मान्यताओं
के अनुसार किसी लघु मात्रिक वर्ण के पश्चात ह वर्ण के साथ यदि अर्द्ध म, न या ल जुड़ा
हो तब उसके पूर्व का लघु वर्ण लघु ही रहता है।
उदाहरण इस प्रकार हैं
–
कुम्हार = १२१,
कुल्हाड़ी = १२२, कन्हाई = १२२
#
~ अशोक रक्ताले ‘फणीन्द्र’
मात्रा
गणना में गणों का प्रयोग भी किया जाता है। यह अधिक प्रचलित
नहीं है किन्तु इस प्रकार है –
मात्रा संख्या संख्या का सरल नाम गण का नाम
6 छक्कल/षट्कल टगण
5 पँचकल/पंचकल ठगण
4 चौकल/चतुष्कल डगण
3 तिकल/त्रिकल ढगण
2 दुक्कल/ द्विकल णगण
हिंदी छंदों में मात्रा संरचना के आधार पर भी इन्हें नामांकित किया गया है –
। -
लघु
S – गुरु
3 मात्रा समूहों की सारिणी
SI - पताका
I S – मणि
III – ललित
4
मात्रा समूहों की सारिणी आर्या वर्ग
अनुसार
SS – कर्णः
करण
IIS – करतलम् कमल
ISI - पयोधरः भूपति
SII – वसुः चरण
IIII – द्विजवरः विप्र
5 मात्रा समूहों की
सारिणी
ISS – इन्द्रासनः
SIS – सूरः
IIIS – चापः
SSI – हीरः
IISI – शेखरः
ISII – कुसुमम्
SIII - अहिगणः
IIIII – पापगणः
6 मात्रा समूहों की
सारिणी
SSS – शिवः
IISS – शशी
ISIS – दिनेश्वरः
SIIS – सुरेशः
IIIIS –शेषः
ISSI – अहिः
SISI – सरोजम्
IIISI –धाता
SSII – कलिः
IISII – चन्द्रमाः
ISIII –ध्रुवः
SIIII – धर्मः
IIIIII – शालिकरः
