अतिबरवै


     1.   अतिबरवै

      

यह 21 मात्राओं का अर्धसम-मात्रिक छंद है। इसके विषम चरणों में 12 मात्राएँ तथा सम चरणों में 9 मात्राएँ होती हैं। सम चरणों का अंत पताका अर्थात् गुरु-लघु से होता है तथा दोनों सम चरणों के मध्य तुकांतता पायी जाती है।

 

वर्षा ऋतु के आते, भरते ज्यों ताल।

ऐसे  ही  भरते  हैं, खुशियों से गाल।।

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वर्षा  से   खेतों  में, आती  है  जान।

तब किसान गाते हैं, झूम-झूम गान।। 

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~ अशोक रक्ताले ‘फणीन्द्र’

 


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